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CTET Maths Pedagogy Notes in Hindi

  1. गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) गणित केवल गणनाओं के बारे में नहीं है, बल्कि यह सोचने का एक तरीका है। • तार्किक और क्रमबद्ध (Logical & Systematic): गणित तार्किक सोच पर आधारित है। इसमें अवधारणाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। • अमूर्त से मूर्त (Abstract to Concrete): गणितीय अवधारणाएं अमूर्त (Abstract) होती हैं, जिन्हें शिक्षण के दौरान 'मूर्त' (Concrete) उदाहरणों से समझाना पड़ता है। • उदाहरण: 'आयतन' (Volume) समझाने के लिए पहले पानी के गिलास या डिब्बे का प्रयोग करना। 2. वैन हीले के ज्यामितीय विचार के स्तर (Levels 0 - 4) स्तर 0: दृश्यीकरण (Visualization) • विवरण: इस स्तर पर बच्चा आकृतियों को उनके पूर्ण रूप और दिखावट (Appearance) के आधार पर पहचानता है। वह गुणों (Properties) के बारे में नहीं सोचता। • सोच का तरीका: "यह गोल है क्योंकि यह रोटी जैसा दिखता है।" • उदाहरण: बच्चा एक वर्ग (Square) और आयत (Rectangle) को केवल उनके आकार के आधार पर अलग करता है। स्तर 1: विश्लेषण (Analysis) • विवरण: यहाँ बच्चा आकृतियों के गुणों (Properties) को समझना ...

वर्षा के प्रकार

1. संवहनीय वर्षा

2. पर्वतीय वर्षा

3. वाताग्रीय वर्षा या चक्रवाती वर्षा


              मेघों काजल सीकर के रूप में पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण नीचे सतह पर गिरना तथा वायुमंडलीय घर्षण के कारण भूतों के रूप में जल कणों का आना वर्षा कहलाता है।


1. संवहनीय वर्षा

                         तीव्र ऊष्मा के कारण समुद्र की सतह पर से तीव्र संवहनीय धाराएं अत्यधिक मात्रा में आद्रता लेकर निस्तर पर उठती हैं तथा संघीय होकर कपासी एवं कपासी वर्षी मेघों का निर्माण करती हैं तथा त्वरित झंझा के साथ मूसलाधार वर्षा करती हैं यह सामान्यतः विसुवतीय क्षेत्रों में महासागरों के ऊपर चक्रवाती है तथा बादल के फटने जैसी स्थिति होती है परंतु ग्रीष्म ऋतु में यह वर्षा उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में होती है।


2. पर्वतीय वर्षा

                     महासागरों के ऊपर से आर्द्रता युक्त पवन पर्वतों के सहारे यांत्रिकी रूप से ऊपर उठती है तथा संघीय होकर कपासी एवं कपासी वर्षक मेघों का निर्माण कर पलना विमुखी ढालों पर मूसलाधार वर्षा तड़ित झंझा के साथ करती हैं परंतु पवन पवनाविमुखी दालों पर हवाओं के ठंडे होकर बैठने के कारण न्यून वर्षा होती है इस प्रकार की वर्षा उत्तरी अमेरिका के रॉकीज तथा दक्षिणी अमेरिका के एंडीज पर्वतों के पवना विमुखी ढाल ऊपर होती है। साथ ही साथ भारत के पश्चिमी घाटों के पश्चिमी भागों में होती है वैसे भारत में इस प्रकार की वर्षा का ही प्रभुत्व है।


3. वाताग्रीय वर्षा या चक्रवाती वर्षा

                             मध्य अक्षांश क्षेत्रों में 60° और 65° पे विरोधाभासी पवनों का अभिसरण होता है परंतु यहां मिश्रण नहीं करती। अतः यह निम्न दाब का क्षेत्र निर्गत होता है जो चक्रवाती स्थिति उत्पन्न करता है इस दौरान उसने हवाएं ठंडी हवाओं के ऊपर उठती हैं तथा संघ अन्य होकर कपासी मेघों का निर्माण करते हुए मध्य अक्षांश क्षेत्रों में भारी वर्षा करती हैं।

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