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कैबिनेट मिशन और संविधान सभा

 कैबिनेट मिशन और संविधान सभा

                                  द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव ब्रिटेन पर नकारात्मक रूप में पड़ता है जिसके कारण ब्रिटेन के पास अब वह क्षमता नहीं रही कि वह अपने उपनिवेश ऊपर अपना नियंत्रण बनाए रहे दूसरी ओर भारत का राष्ट्रीय आंदोलन एक जन आंदोलन के रूप में परिवर्तित हो गया था। समाज के सभी वर्ग राष्ट्रीय आंदोलन से किसी न किसी रूप में अवश्य जुड़ रहे थे इन स्थितियों को लेकर ब्रिटिश सरकार ने क्रिप्स मिशन की असफलता तथा भारत की राजनीतिक समस्याओं का समाधान करने के लिए तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन 1946 में भारत भेजा कैबिनेट मिशन में जो प्रस्ताव रखें उससे कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग सहमत हो गए।

1. भारत का विभाजन करके भारत और पाकिस्तान के रूप में दो राज्य अस्तित्व में आएंगे।

2. भारत के संविधान का निर्माण भारत की जनता करेगी जिसके लिए संविधान सभा का गठन किया जाएगा अतः कैबिनेट मिशन का प्रस्ताव पर संविधान सभा का गठन किया गया।

3. देसी रियासतों को यह स्वतंत्रता दी गई कि वे अपने रियासत का विलय भारत या पाकिस्तान किसी संघ में कर लें या अपने रियासत का स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रख सकते हैं। 

                कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव पर स्वतंत्र भारत के लिए राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना करने के लिए संविधान के निर्माण को लेकर संविधान सभा का गठन किया गया संविधान सभा का गठन जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों से मिलकर होता है जिसका मुख्य दायित्व संविधान का निर्माण करना होता है भारतीय संविधान का निर्माण करने के लिए जिस संविधान सभा का गठन किया गया उस संविधान सभा के लिए कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं हुआ था इसलिए यह प्रश्न उठना स्वाभाविक हो जाता है कि भारतीय संविधान सभा के सदस्य जनता के निर्वाचित सदस्य कैसे हैं स्वतंत्रता के साथ भारत के समक्ष ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो गई थी कि उसे लेकर प्रत्यक्ष निर्वाचन संभव नहीं था इसलिए पूर्व के चुनावों के निर्वाचित प्रतिनिधियों (10 lakh = एक प्रतिनिधि) निर्वाचित प्रतिनिधियों को लेकर संविधान सभा का गठन किया गया इसलिए संविधान सभा के सदस्य के निर्वाचन के लिए कोई प्रत्यक्ष चुनाव भले ही ना हुआ हो लेकिन संविधान सभा के सदस्य जनता के निर्वाचित सदस्य थे संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई जिसमें सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष चुना गया 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को अपना स्थाई अध्यक्ष चुना और 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू ने संविधान सभा के समक्ष उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया तत्पश्चात संविधान सभा के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श करते हुए 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में भारत के लिए संविधान का निर्माण किया।

                      संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए जिस संविधान का निर्माण किया उस संविधान का शीर्षक " constitution of India" रखा जिसमें 394 अनुच्छेद थे। 58 वें संविधान संशोधन 1987 के द्वारा जब हिंदी में अनुवाद किया गया तो भारत के संविधान के रूप में परिवर्तित हो गया और वह संविधान 26 जनवरी 1950 (अनुच्छेद 393) को लागू कर दिया गया।

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