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CTET Maths Pedagogy Notes in Hindi

  1. गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) गणित केवल गणनाओं के बारे में नहीं है, बल्कि यह सोचने का एक तरीका है। • तार्किक और क्रमबद्ध (Logical & Systematic): गणित तार्किक सोच पर आधारित है। इसमें अवधारणाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। • अमूर्त से मूर्त (Abstract to Concrete): गणितीय अवधारणाएं अमूर्त (Abstract) होती हैं, जिन्हें शिक्षण के दौरान 'मूर्त' (Concrete) उदाहरणों से समझाना पड़ता है। • उदाहरण: 'आयतन' (Volume) समझाने के लिए पहले पानी के गिलास या डिब्बे का प्रयोग करना। 2. वैन हीले के ज्यामितीय विचार के स्तर (Levels 0 - 4) स्तर 0: दृश्यीकरण (Visualization) • विवरण: इस स्तर पर बच्चा आकृतियों को उनके पूर्ण रूप और दिखावट (Appearance) के आधार पर पहचानता है। वह गुणों (Properties) के बारे में नहीं सोचता। • सोच का तरीका: "यह गोल है क्योंकि यह रोटी जैसा दिखता है।" • उदाहरण: बच्चा एक वर्ग (Square) और आयत (Rectangle) को केवल उनके आकार के आधार पर अलग करता है। स्तर 1: विश्लेषण (Analysis) • विवरण: यहाँ बच्चा आकृतियों के गुणों (Properties) को समझना ...

वाक्य रचना: वाक्य के प्रकार, भेद, वाक्य के अंग, और वाक्य के भागों के बारे में

 वाक्य रचना: वाक्य के प्रकार, भेद, वाक्य के अंग, और वाक्य के भागों के बारे में

वाक्य रचना व्याकरण में एक महत्वपूर्ण भाग है, जो वाक्यों को विभाजित करता है और उनके अंगों को परिभाषित करता है। वाक्य रचना का अध्ययन हमें वाक्य के प्रकार, भेद, वाक्य के अंग, और वाक्य के भागों के बारे में जानने में मदद करता है।

  1. वाक्य के प्रकार:

    • सरल वाक्य:

    • एक पूर्ण वाक्य जो किसी भी विषय को स्पष्ट रूप से प्रकट करता है, उदाहरण: "राम खेल रहा है।"

    • संयुक्त वाक्य:

    • दो या दो से अधिक पूर्ण वाक्यों का संयोजन, उदाहरण: "राम खेल रहा है और श्याम पढ़ रहा है।"

    • अधिकरण वाक्य:

    • किसी विशेष अधिकरण को संदर्भित करने वाला वाक्य, उदाहरण: "यहाँ पर पुस्तकें हैं।"
  2. वाक्य के भेद:

    • सरल वाक्य:

    • एक साधारण वाक्य जो एक ही कार्य को व्यक्त करता है।

    • संयुक्त वाक्य:

    • एक से अधिक वाक्यों का संयोजन, जो विशेष अर्थ प्रदान करता है।

    • अधिकरण वाक्य:

    • विशेष अधिकरण को संदर्भित करने वाला वाक्य।
  3. वाक्य के अंग:

    एक पूर्ण वाक्य में निम्नलिखित अंग होते हैं:

    • विषय (Subject): वाक्य में वह शब्द जो कार्य कर रहा है या जिस पर वाक्य का विशेषता केंद्रित होता है।

    • कर्म (Predicate): वाक्य में वह शब्द जो विषय के कार्य को व्यक्त करता है या जिससे विषय के बारे में जानकारी दी जाती है।

  4. वाक्य के भाग:

    वाक्य के दो भाग होते हैं: पूर्ण वाक्य में विशेषण भाग (विशेषण, क्रिया और क्रियाविशेषण) और प्रधान भाग (विषय और कर्म)। इन भागों का संयोजन करके पूर्ण वाक्य बनता है।

इन भागों के सम्मिलन से हम एक पूर्ण वाक्य बनाते हैं, जो एक सार्थक विचार को प्रकट करता है और भाषा के समृद्धता को बढ़ाता है। वाक्य रचना का अध्ययन हमें वाक्य निर्माण में सुन्दरता और व्यक्तिगतता को बढ़ावा देता है।

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