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CTET Maths Pedagogy Notes in Hindi

  1. गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) गणित केवल गणनाओं के बारे में नहीं है, बल्कि यह सोचने का एक तरीका है। • तार्किक और क्रमबद्ध (Logical & Systematic): गणित तार्किक सोच पर आधारित है। इसमें अवधारणाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। • अमूर्त से मूर्त (Abstract to Concrete): गणितीय अवधारणाएं अमूर्त (Abstract) होती हैं, जिन्हें शिक्षण के दौरान 'मूर्त' (Concrete) उदाहरणों से समझाना पड़ता है। • उदाहरण: 'आयतन' (Volume) समझाने के लिए पहले पानी के गिलास या डिब्बे का प्रयोग करना। 2. वैन हीले के ज्यामितीय विचार के स्तर (Levels 0 - 4) स्तर 0: दृश्यीकरण (Visualization) • विवरण: इस स्तर पर बच्चा आकृतियों को उनके पूर्ण रूप और दिखावट (Appearance) के आधार पर पहचानता है। वह गुणों (Properties) के बारे में नहीं सोचता। • सोच का तरीका: "यह गोल है क्योंकि यह रोटी जैसा दिखता है।" • उदाहरण: बच्चा एक वर्ग (Square) और आयत (Rectangle) को केवल उनके आकार के आधार पर अलग करता है। स्तर 1: विश्लेषण (Analysis) • विवरण: यहाँ बच्चा आकृतियों के गुणों (Properties) को समझना ...

CTET Special Notes:- Dyslexia, Dysgraphia, Dysphagia, Dyspraxia, Dysarthria क्या है और इनके बीच अंतर?

CTET Special Notes

Dyslexia, Dysgraphia, Dysphagia, Dyspraxia, Dysarthria क्या है और इनके बीच अंतर?

बिना किसी शिक्षागत बीमारी के कारण लोग कई प्रकार की क्षमता में कमी के साथ जन्म लेते हैं, जिनमें से कुछ बीमारियाँ जिन्हें "डिस-" शब्द से शुरू किया जाता है, हैं:


1. डिसलेक्सिया (Dyslexia): 

यह विद्या में कठिनाई पैदा करने वाली एक बीमारी है, जिसके कारण पढ़ने, लिखने और स्पष्ट बोलने में कठिनाई हो सकती है।


2. डिसग्राफिया (Dysgraphia): 

इसमें व्यक्ति को लिखने में मुश्किल हो सकती है, जैसे कि अक्षरों को सही तरीके से बनाने में दिक्कत हो।


3. डिसफेजिया (Dysphagia):

 यह खाने पीने में समस्या की एक बीमारी है, जिसके कारण व्यक्ति को खाना और पीना स्वाभाविक रूप से करने में कठिनाई हो सकती है।


4. डिसप्रैक्सिया (Dyspraxia):

 इसमें मांसपेशियों की कणिकाएँ सही तरीके से काम नहीं करती हैं, जिससे किसी भी शारीरिक काम को करने में कठिनाई हो सकती है।


5. डिसार्थ्रिया (Dysarthria): 

इसमें व्यक्ति के बोलने में कठिनाई होती है जिसकी वजह से वे स्पष्टता से बोलने में समस्या महसूस कर सकते हैं।


ये सभी बीमारियाँ किसी भी व्यक्ति के शिक्षागत और सामाजिक विकास पर असर डाल सकती हैं, लेकिन सही समर्थन और उपचार से इन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

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