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UP D.El.Ed Second Semester English Previous years Question with Answer

  यह द्वितीय सेमेस्टर - 2025 के सप्तम् प्रश्न-पत्र (अंग्रेजी) के प्रश्नों के उत्तर हैं: Objective Questions • Q1) The total number of sounds in English language are: 4) 44    • Q2) The two receptive skills are: 4) Listening and reading    • Q3) Who invented 'Bilingual Method'? 3) C.J. Dodson    • Q4) Which one of the following is not an example of imperative sentence: 4) I am going to market.    • Q5) Which word used in definite article: 3) The    Very Short Answer Questions • Q6) Point out the Noun: Sword and Steel    • Q7) Correct pronoun: The book is mine .    • Q8) Suitable article: I have a one rupee note. (क्योंकि 'one' का उच्चारण 'w' यानी व्यंजन ध्वनि से शुरू होता है)    • Q9) Point out the adjective: Foolish    • Q10) Complete the sentence: He is too slow to win the race.    • Q11) Passive voice: Invitation cards were being made by them.  ...

NCERT Class 12 Hindi: Lesson 3 - “आत्म-निर्भरता” (Atmanirbharta) - Notes

 NCERT Class 12 Hindi: Lesson 3 - “आत्म-निर्भरता” (Atmanirbharta) - Notes


यह पाठ भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और विचारक महात्मा गांधी द्वारा लिखा गया है। इसमें महात्मा गांधी ने आत्मनिर्भरता के महत्व पर चर्चा की है, जो स्वतंत्रता और आत्म सम्मान की ओर पहला कदम है।


मुख्य बिंदु:

1. आत्मनिर्भरता का महत्व:

महात्मा गांधी के अनुसार, आत्मनिर्भरता न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह भारत को विदेशी शक्तियों से स्वतंत्रता प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।

आत्मनिर्भरता का मतलब केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी है। जब व्यक्ति आत्मनिर्भर होता है, तो वह अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर सकता है और दूसरों पर निर्भर नहीं रहता।

2. स्वदेशी सामान का प्रयोग:

गांधीजी ने स्वदेशी सामान का प्रयोग करने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि यदि हम विदेशी सामान का बहिष्कार करते हैं और अपने देश में उत्पादित सामान का उपयोग करते हैं, तो हम न केवल आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि हमारी राष्ट्रीय एकता भी मजबूत होगी।

विशेष रूप से ‘खादी’ को अपनाने का आह्वान किया गया, जो स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक था और आत्मनिर्भरता के आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

3. आध्यात्मिक और मानसिक स्वतंत्रता:

आत्मनिर्भरता का सिर्फ भौतिक पक्ष ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक पक्ष भी है। गांधीजी के अनुसार, जब हम अपनी मानसिक और आत्मिक शक्ति को पहचानते हैं, तो हम बाहरी दबावों से मुक्त हो सकते हैं और अपने जीवन को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

4. सामाजिक दृष्टिकोण:

गांधीजी का कहना था कि आत्मनिर्भरता केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह समाज में समानता, शिक्षा, और न्याय की दिशा में भी योगदान देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब दूसरों को नीचा दिखाना या उन पर निर्भर होना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामूहिक समृद्धि और समाज के विकास में योगदान देना है।

5. आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता संग्राम:

गांधीजी के अनुसार, आत्मनिर्भरता हमारे स्वतंत्रता संग्राम का अभिन्न हिस्सा है। जब तक हम स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे, तब तक हम विदेशी शासन से पूरी तरह मुक्त हो सकेंगे।

यह पाठ भारतीय जनता को जागरूक करने के लिए था कि उन्हें अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए और विदेशी शक्तियों से मुक्त होकर अपने देश की उन्नति की दिशा में काम करना चाहिए।


सारांश:


“आत्म-निर्भरता” पाठ में महात्मा गांधी ने व्यक्तिगत और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भरता केवल भौतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक, और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आत्मनिर्भरता के माध्यम से ही हम अपने देश को स्वतंत्र बना सकते हैं और समाज में समानता तथा न्याय स्थापित कर सकते हैं।


कविता, कहानी या निबंधों में उपयोगी बिंदु:

गांधीजी का दृष्टिकोण यह था कि आत्मनिर्भरता से हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं और दूसरों पर निर्भरता को समाप्त कर सकते हैं।

स्वदेशी सामान का प्रयोग और खादी को अपनाना स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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