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CTET 2026, 8 Feb Paper- 2 CDP

  1. In an inclusive classroom, adaptations should be made in : (a) Learning goals (b) Teaching-learning strategies (c) Provisioning of support (d) Assessment (1) (a), (c), (d) (2) (b), (c), (d) (3) (a), (b), (c), (d) (4) (a), (b), (d) एक समावेशी कक्षा में अनुकूलन किसमें किया जाना चाहिए? (a) अधिगम के लक्ष्य में (b) शिक्षण-अधिगम की रणनीतियों में (c) सहायता के प्रावधान में (d) मूल्यांकन में (1) (a), (c), (d) (2) (b), (c), (d) (3) (a), (b), (c), (d) (4) (a), (b), (d) 2. Which of the following does not come under the category of sensory impairments? (1) dysgraphia (2) hard of hearing (3) partial loss of vision (4) colour blindness निम्नलिखित में से कौन-सी अक्षमता संवेदी बाधिता के अंतर्गत नहीं आती है? (1) लेखन वैकल्य (2) श्रवण में कठिनाई (3) दृष्टि की आंशिक हानि (4) रंग दृष्टिहीनता 3. According to Jean Piaget, cognitive development : (1) is dependent upon the development of language capabilities. (2) is the process of acquiring the ability to use cultural t...

NCERT Class 12 Hindi: Lesson 4 - “सपने और जीवन” (Sapne Aur Jeevan) - Notes

NCERT Class 12 Hindi: Lesson 4 - “सपने और जीवन” (Sapne Aur Jeevan) - Notes


यह पाठ प्रसिद्ध लेखक और कवि रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखा गया है। इस निबंध में लेखक ने जीवन के संघर्षों, सपनों और वास्तविकता के बीच के रिश्ते को दर्शाया है। इसमें उन्होंने यह भी बताया है कि व्यक्ति को अपनी सपनों की ओर निरंतर प्रयास करते हुए चलना चाहिए, लेकिन साथ ही अपने सपनों और वास्तविकता के बीच संतुलन भी बनाए रखना चाहिए।


मुख्य बिंदु:

1. सपनों का महत्व:

लेखक ने सपनों को जीवन में एक प्रेरक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। वे मानते हैं कि सपने किसी भी व्यक्ति को उन्नति की ओर प्रेरित करते हैं। यह मनुष्य के भीतर एक ऊर्जा का संचार करते हैं, जो उसे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

सपने जीवन को दिशा देते हैं और बिना सपनों के जीवन अधूरा सा लगता है।

2. सपनों की वास्तविकता:

हालांकि, लेखक ने यह भी बताया कि केवल सपनों के आधार पर जीवन नहीं जीना चाहिए। सपने होते हुए भी व्यक्ति को अपनी वास्तविकता और परिस्थितियों का भी आकलन करना चाहिए।

यदि हम केवल सपनों में खो जाते हैं और वास्तविकता को नज़रअंदाज करते हैं, तो हम जीवन के संघर्षों का सही तरीके से सामना नहीं कर पाएंगे।

3. जीवन के संघर्ष:

जीवन के रास्ते पर निरंतर संघर्ष होते रहते हैं, और ये संघर्ष व्यक्ति को सशक्त बनाते हैं। लेखक के अनुसार, जीवन में हमें वास्तविकता को स्वीकार करते हुए संघर्षों का सामना करना चाहिए। हर व्यक्ति को अपने संघर्षों को जीतने के लिए कठिन मेहनत करनी पड़ती है।

सपने दिखाने के बावजूद, यदि हम संघर्षों से डरते हैं, तो हमें अपने सपनों तक पहुँचने में मुश्किलें आएंगी।

4. सपनों और मेहनत का संबंध:

लेखक ने यह स्पष्ट किया कि सपने देखने के साथ-साथ मेहनत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सपने केवल दिशा दिखाते हैं, लेकिन उस दिशा में सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम जरूरी है।

व्यक्ति यदि अपने सपनों को साकार करने के लिए ईमानदारी से काम करता है, तो जीवन में सफलता अवश्य मिलती है।

5. सपने और निराशा:

लेखक ने यह भी बताया कि कभी-कभी व्यक्ति के सपने पूरे नहीं हो पाते हैं, और उसे निराशा का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में उसे निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि आगे बढ़ने के लिए नए प्रयास करने चाहिए।

जीवन में निराशा भी एक अध्याय है, और यह हमें और मजबूत बनाती है।


सारांश:


“सपने और जीवन” पाठ में रामवृक्ष बेनीपुरी ने जीवन की वास्तविकता और सपनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि सपने जीवन में ऊर्जा का स्रोत होते हैं, लेकिन उन्हें वास्तविकता के आधार पर परखकर ही कार्य करना चाहिए। जीवन के संघर्षों का सामना करते हुए, व्यक्ति को अपने सपनों की ओर निरंतर मेहनत करते हुए बढ़ना चाहिए। यदि व्यक्ति अपनी मेहनत और संघर्ष को सही दिशा में लगाता है, तो वह अपने सपनों को जरूर पूरा कर सकता है।


कविता, कहानी या निबंधों में उपयोगी बिंदु:

सपने जीवन में प्रेरणा देने का काम करते हैं, लेकिन उन्हें साकार करने के लिए वास्तविकता और मेहनत की आवश्यकता होती है।

संघर्ष और निराशा के बावजूद, व्यक्ति को अपने सपनों की ओर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

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