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CTET 2026, 8 Feb Paper- 2 CDP

  1. In an inclusive classroom, adaptations should be made in : (a) Learning goals (b) Teaching-learning strategies (c) Provisioning of support (d) Assessment (1) (a), (c), (d) (2) (b), (c), (d) (3) (a), (b), (c), (d) (4) (a), (b), (d) एक समावेशी कक्षा में अनुकूलन किसमें किया जाना चाहिए? (a) अधिगम के लक्ष्य में (b) शिक्षण-अधिगम की रणनीतियों में (c) सहायता के प्रावधान में (d) मूल्यांकन में (1) (a), (c), (d) (2) (b), (c), (d) (3) (a), (b), (c), (d) (4) (a), (b), (d) 2. Which of the following does not come under the category of sensory impairments? (1) dysgraphia (2) hard of hearing (3) partial loss of vision (4) colour blindness निम्नलिखित में से कौन-सी अक्षमता संवेदी बाधिता के अंतर्गत नहीं आती है? (1) लेखन वैकल्य (2) श्रवण में कठिनाई (3) दृष्टि की आंशिक हानि (4) रंग दृष्टिहीनता 3. According to Jean Piaget, cognitive development : (1) is dependent upon the development of language capabilities. (2) is the process of acquiring the ability to use cultural t...

सम्प्रेषण विज्ञान: परिभाषा, प्रकार और महत्व

सम्प्रेषण विज्ञान: परिभाषा, प्रकार और महत्व


भूमिका


सम्प्रेषण (Communication) मानव समाज का अभिन्न अंग है। यह केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि विचारों, भावनाओं और ज्ञान को एक व्यक्ति या समूह से दूसरे तक पहुँचाने की प्रक्रिया है। सम्प्रेषण विज्ञान (Communication Science) इसी प्रक्रिया का अध्ययन करता है।


आज के डिजिटल युग में सम्प्रेषण की परिभाषा और माध्यम तेजी से बदल रहे हैं। इस ब्लॉग में हम सम्प्रेषण विज्ञान की विस्तृत जानकारी देंगे, जिससे विद्यार्थी और शोधार्थी इसे अच्छी तरह समझ सकें।

Sampreshan Vigyan



सम्प्रेषण क्या है?


सम्प्रेषण (Communication) वह प्रक्रिया है जिसमें एक प्रेषक (Sender) किसी संदेश (Message) को एक माध्यम (Medium) के द्वारा प्राप्तकर्ता (Receiver) तक पहुँचाता है और प्रतिक्रिया (Feedback) प्राप्त करता है। यह प्रक्रिया पारस्परिक होती है और इसमें कई तत्व शामिल होते हैं, जैसे:

प्रेषक (Sender): जो संदेश भेजता है

संदेश (Message): जो जानकारी साझा की जाती है

माध्यम (Medium): संचार के साधन, जैसे बोलचाल, लेखन, रेडियो, टीवी, इंटरनेट

प्राप्तकर्ता (Receiver): जो संदेश प्राप्त करता है

प्रतिक्रिया (Feedback): संदेश के प्रति प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया


सम्प्रेषण विज्ञान क्या है?


सम्प्रेषण विज्ञान (Communication Science) वह अध्ययन क्षेत्र है, जो यह समझने का प्रयास करता है कि सूचना कैसे प्रसारित होती है, इसे लोग कैसे ग्रहण करते हैं, और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।


यह विषय समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, भाषा विज्ञान, और प्रौद्योगिकी से जुड़ा हुआ है। आज के समय में मीडिया, पत्रकारिता, जनसंपर्क (Public Relations) और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में सम्प्रेषण विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है।


सम्प्रेषण के प्रकार


सम्प्रेषण को कई प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है:


1. माध्यम के आधार पर

मौखिक सम्प्रेषण (Verbal Communication): बातचीत, भाषण, टेलीफोन वार्ता

अमौखिक सम्प्रेषण (Non-Verbal Communication): हाव-भाव, शारीरिक भाषा, संकेत

लिखित सम्प्रेषण (Written Communication): ईमेल, पत्र, रिपोर्ट, सोशल मीडिया पोस्ट

दृश्य-श्रव्य सम्प्रेषण (Audio-Visual Communication): वीडियो, टेलीविजन, पॉडकास्ट


2. दिशा के आधार पर

एकपक्षीय सम्प्रेषण (One-Way Communication): जब सूचना केवल एक तरफ से भेजी जाती है (जैसे रेडियो, टीवी)

द्विपक्षीय सम्प्रेषण (Two-Way Communication): जब सूचना का आदान-प्रदान दोनों ओर से होता है (जैसे बातचीत, चैटिंग)


3. संरचना के आधार पर

औपचारिक सम्प्रेषण (Formal Communication): कार्यालय, सरकारी संस्थानों में उपयोग होने वाला सम्प्रेषण

अनौपचारिक सम्प्रेषण (Informal Communication): दोस्तों, परिवार के बीच होने वाली बातचीत


सम्प्रेषण विज्ञान का महत्व


सम्प्रेषण विज्ञान के अध्ययन से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे सूचनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए और कैसे गलतफहमी से बचा जाए। इसके कुछ प्रमुख लाभ हैं:

1. व्यक्तिगत विकास: प्रभावी सम्प्रेषण से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है।

2. कार्यक्षेत्र में सफलता: व्यवसाय, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, जनसंपर्क और मीडिया में सम्प्रेषण एक अनिवार्य कौशल है।

3. सामाजिक सुधार: समाज में जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया और डिजिटल संचार का उपयोग किया जाता है।

4. शिक्षा में योगदान: शिक्षण और अनुसंधान के लिए सम्प्रेषण आवश्यक है।


आधुनिक युग में सम्प्रेषण के नए आयाम


आज के डिजिटल युग में सम्प्रेषण विज्ञान का क्षेत्र काफी विस्तृत हो चुका है। सोशल मीडिया, इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल मार्केटिंग ने इसे नए आयाम दिए हैं। कुछ आधुनिक ट्रेंड्स हैं:

सोशल मीडिया मार्केटिंग (Facebook, Instagram, Twitter)

इंस्टेंट मैसेजिंग (WhatsApp, Telegram)

डिजिटल पत्रकारिता (Blogs, Vlogs, Online News)

वीडियो संचार (YouTube, Zoom, Webinars)


निष्कर्ष


सम्प्रेषण विज्ञान न केवल संवाद की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है, बल्कि यह मीडिया, जनसंपर्क और डिजिटल युग में बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। यदि आप इस क्षेत्र में रुचि रखते हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन अध्ययन क्षेत्र हो सकता है।


अगर आप सम्प्रेषण विज्ञान पर अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे अन्य लेख भी पढ़ें और अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें।


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