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CTET 2026 | Paper- 1 CDP Questions

  Here are the 30 questions from the Child Development and Pedagogy (CDP) section as presented in the images, provided in both English and Hindi. PART—I / भाग—I CHILD DEVELOPMENT AND PEDAGOGY / बाल विकास व शिक्षाशास्त्र 1. Rama was mean to her brother Tahir. Next day Tahir got sick. Rama concluded that she made her brother sick. According to Piaget, which stage of cognitive development is Rama in? (1) Preoperational stage (2) Concrete operational stage (3) Formal operational stage (4) Sensorimotor stage रमा ने अपने भाई ताहिर के साथ मतलबी तरीके से व्यवहार किया। अगले दिन ताहिर बीमार हो गया। रमा ने निष्कर्ष निकाला कि उसने अपने भाई को बीमार कर दिया। पियाजे के अनुसार, रमा संज्ञानात्मक विकास के किस चरण में है? (1) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (3) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (4) संवेदी-चालक अवस्था 2. _______ is the process by which children become aware of their gender roles. (1) Gender equality (2) Gender relatedness (3) Gender homogeneity (4...

गांधी और राजनीतिक चिंतन MGP4 Question Answer

 


1. गांधी जी की राजनीतिक विचारधारा को आकार देने वाले बौद्धिक प्रभाव कौन से थे?



महात्मा गांधी की राजनीतिक विचारधारा विभिन्न बौद्धिक स्रोतों और व्यक्तियों से प्रभावित रही। इनमें भारतीय परंपरा से लेकर पश्चिमी चिंतन तक शामिल हैं।



मुख्य प्रभाव:



  • भगवद गीता: आत्मसंयम, निष्काम कर्म और अहिंसा की प्रेरणा गीता से मिली।
  • जॉन रस्किन: उनकी पुस्तक “Unto This Last” ने गांधी को श्रम, समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा दी।
  • लियो टॉल्सटॉय: प्रेम, करुणा, नैतिकता और सत्य के नैतिक आधार टॉल्सटॉय से आए।
  • हेनरी डेविड थोरो: नागरिक अवज्ञा (Civil Disobedience) का विचार गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांत में शामिल हुआ।
  • श्रवण, हरिश्चंद्र, रामायण: पौराणिक चरित्रों से सत्य, सेवा और त्याग की भावना उत्पन्न हुई।



गांधीजी ने इन प्रभावों को आत्मसात कर एक भारतीय सापेक्ष राजनीतिक विचारधारा का विकास किया।





2. राज्य और स्वराज पर गांधी जी के क्या विचार हैं? क्या इनका समान सत्व है?




राज्य पर विचार:



  • गांधी राज्य को “ज़रूरी बुराई” मानते थे।
  • उनका आदर्श राज्य अहिंसक, विकेंद्रीकृत और नैतिक होना चाहिए।
  • वे राज्य को अत्यधिक केंद्रीकरण और जबरदस्ती के विरुद्ध मानते थे।




स्वराज पर विचार:



  • स्वराज केवल ब्रिटिश शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण है।
  • यह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों स्तरों पर आत्मनिर्भरता और नैतिकता का समन्वय है।



✅ समान सत्व:

दोनों में ही सत्ता का विकेंद्रीकरण, नैतिकता और आत्मशासन की भावना निहित है। राज्य एक बाहरी संस्था है जबकि स्वराज आंतरिक अनुशासन और नैतिक बल है।





3. “गांधी जी के अनुसार समग्र राजनीतिक परिदृश्य के लिए ग्राम स्वराज बहुत महत्वपूर्ण था” – क्या आप इस कथन से सहमत हैं?



हाँ, पूर्णतः सहमत।


ग्राम स्वराज गांधी जी के राजनीतिक दर्शन का केंद्रीय स्तंभ था।



कारण:



  • आत्मनिर्भरता: गांवों को खाद्य, वस्त्र, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि में स्वावलंबी बनाना।
  • विकेंद्रीकरण: सत्ता गांवों के हाथ में देना ताकि जनता को सीधे भागीदारी मिले।
  • नैतिक समाज: गांवों को सत्य, अहिंसा, सहयोग और सेवा के मूल्यों पर आधारित बनाना।



ग्राम स्वराज राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आधार था, जिससे समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति में संतुलन आए।





4. अधिकारों और कर्तव्यों पर गांधी जी के विचारों पर चर्चा कीजिए।



गांधीजी ने कर्तव्यों को अधिकारों से ऊपर स्थान दिया।



मुख्य विचार:



  • “यदि हर व्यक्ति अपने कर्तव्य निभाए, तो अधिकार अपने आप मिल जाते हैं।”
  • कर्तव्य आधारित समाज ही टिकाऊ और नैतिक हो सकता है।
  • उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सुधार के बिना सामाजिक अधिकार संभव नहीं हैं।



उनकी दृष्टि में अधिकारों की मांग करने से पहले आत्म-अनुशासन और आत्म-नियंत्रण आवश्यक है।





5. गांधीजी अंत को प्राप्त करने के लिए साधनों की शुद्धता पर ज़ोर क्यों देते हैं?



गांधीजी मानते थे कि साध्य और साधन एक ही वृक्ष के दो बीज हैं।



मुख्य कारण:



  • अनैतिक साधनों से नैतिक लक्ष्य नहीं प्राप्त हो सकता।
  • शुद्ध साधन ही लक्ष्य को शुद्ध और टिकाऊ बनाते हैं।
  • यदि साधन हिंसक हों, तो परिणाम भी अस्थायी और भ्रष्ट हो जाता है।



इसलिए सत्याग्रह, असहयोग और नैतिक संघर्ष उनके प्रमुख साधन बने।





6. ‘शक्ति’ शब्द से आप क्या समझते हैं? गांधीजी के उस पर क्या विचार हैं?




शक्ति का सामान्य अर्थ:



किसी कार्य को करने की क्षमता या प्रभाव।



गांधी के अनुसार शक्ति:



  • नैतिक बल (Moral Force): सत्य, करुणा और आत्मबल ही असली शक्ति है।
  • आत्मशक्ति: बाहरी बल नहीं, बल्कि आत्म-संयम ही मनुष्य को शक्तिशाली बनाता है।
  • अहिंसक शक्ति: असहयोग, उपवास और आत्मबल के माध्यम से समाज को बदलने की शक्ति।



गांधी के लिए शक्ति का आधार भय का नहीं, प्रेम का होना चाहिए।





7. उपनिवेशवाद के खिलाफ गांधीजी के अहिंसक संघर्ष की विस्तार से चर्चा कीजिए।



गांधीजी का उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष अहिंसा, नैतिक बल और जनशक्ति पर आधारित था।



मुख्य रणनीतियाँ:



  • सत्याग्रह: नैतिक असहमति का प्रभावी तरीका।
  • असहयोग आंदोलन (1920): ब्रिटिश संस्थाओं का बहिष्कार।
  • नमक सत्याग्रह (1930): दमनकारी कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्ण अवज्ञा।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): अंतिम जनांदोलन, जिसमें स्वतंत्रता की पुकार थी।



गांधीजी ने दिखाया कि बिना हिंसा के भी नैतिक दबाव और जनचेतना के माध्यम से औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी जा सकती है।





8. संक्षिप्त टिप्पणी:




(अ) न्याय का सिद्धांत:



गांधी के अनुसार न्याय केवल विधिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नैतिक संतुलन है। सत्य, करुणा और समानता पर आधारित समाज ही न्यायपूर्ण हो सकता है।



(ब) समाजवाद:



गांधी नैतिक समाजवाद के समर्थक थे। वे निजी संपत्ति के खिलाफ नहीं थे, पर उसका उपयोग समाज के हित में होना चाहिए — जिसे उन्होंने “ट्रस्टीशिप” कहा।





9. फासीवाद और समाजवाद के बीच क्या कड़ी है – विश्लेषण कीजिए:




सामान्य बिंदु:



  • दोनों ही राज्य के केंद्रीयकरण को मानते हैं।
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सीमांकन करते हैं।
  • दोनों में राजनीतिक असहमति के प्रति असहिष्णुता देखी गई (हालांकि समाजवाद में सैद्धांतिक रूप से लोकतंत्र शामिल है)।




प्रमुख अंतर:



  • फासीवाद – तानाशाही, सैन्यवाद और नस्लीय श्रेष्ठता पर आधारित।
  • समाजवाद – आर्थिक समानता और वर्गविहीन समाज का लक्ष्य।



✅ कड़ी यह है कि दोनों राजनीतिक रूप से अधिनायकवादी रूप ले सकते हैं, अगर नैतिक आधार न हो।


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