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UP D.El.Ed Second Semester English Previous years Question with Answer

  यह द्वितीय सेमेस्टर - 2025 के सप्तम् प्रश्न-पत्र (अंग्रेजी) के प्रश्नों के उत्तर हैं: Objective Questions • Q1) The total number of sounds in English language are: 4) 44    • Q2) The two receptive skills are: 4) Listening and reading    • Q3) Who invented 'Bilingual Method'? 3) C.J. Dodson    • Q4) Which one of the following is not an example of imperative sentence: 4) I am going to market.    • Q5) Which word used in definite article: 3) The    Very Short Answer Questions • Q6) Point out the Noun: Sword and Steel    • Q7) Correct pronoun: The book is mine .    • Q8) Suitable article: I have a one rupee note. (क्योंकि 'one' का उच्चारण 'w' यानी व्यंजन ध्वनि से शुरू होता है)    • Q9) Point out the adjective: Foolish    • Q10) Complete the sentence: He is too slow to win the race.    • Q11) Passive voice: Invitation cards were being made by them.  ...

Non Violent Movement After Gandhi MGPE007 Question Answer in Hindi

 


1. लोकतंत्र और सामाजिक क्रांति पर टिप्पणी कीजिए जो भारतीय संविधान में वर्णित है



भारतीय संविधान में लोकतंत्र और सामाजिक क्रांति का गहरा अंतर्संबंध देखा जा सकता है। संविधान का उद्देश्य केवल एक राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति को आगे बढ़ाना भी है।



लोकतंत्र की परिभाषा:



भारतीय लोकतंत्र केवल चुनाव आधारित प्रणाली नहीं, बल्कि जन भागीदारी, समानता, स्वतंत्रता, और न्याय पर आधारित शासन प्रणाली है। यह संविधान की प्रस्तावना में “लोकतंत्रात्मक गणराज्य” के रूप में व्यक्त है।



सामाजिक क्रांति का दृष्टिकोण:



डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि संविधान “भारत में सामाजिक क्रांति का यंत्र है।” इसका उद्देश्य जाति, लिंग, धर्म आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त कर एक न्यायसंगत समाज बनाना है।



संवैधानिक प्रावधान:



  • अनुच्छेद 14 से 18: समानता का अधिकार
  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 38, 39, 46 (नीति निदेशक तत्व): समाज में समानता और सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना




गांधीवादी दृष्टिकोण से जोड़:



गांधी का स्वराज भी इसी सामाजिक क्रांति का पर्याय था, जिसमें आत्मशासन के साथ सामाजिक समानता और नैतिकता की आवश्यकता थी।



निष्कर्ष:



भारतीय संविधान का लोकतांत्रिक ढांचा सामाजिक क्रांति को सशक्त करता है। यह न केवल सरकार चुनने का अधिकार देता है, बल्कि एक समावेशी और समतामूलक समाज की नींव भी रखता है।





2. शांतिपूर्ण आंदोलन पर गांधी के सोच की विवेचना कीजिए



महात्मा गांधी के अनुसार शांतिपूर्ण आंदोलन यानी अहिंसक संघर्ष किसी अन्यायपूर्ण सत्ता या व्यवस्था के खिलाफ नैतिक बल द्वारा विरोध करने की प्रक्रिया है।



गांधी का दृष्टिकोण:



  • उन्होंने अहिंसा को केवल रणनीति नहीं, बल्कि जीवन मूल्य और आध्यात्मिक साधन माना।
  • गांधी का विश्वास था कि सत्य और प्रेम के माध्यम से ही समाज में स्थायी परिवर्तन संभव है।
  • वे मानते थे कि हिंसा से व्यवस्था बदलती है, पर मानसिकता नहीं।




शांतिपूर्ण आंदोलन की विशेषताएँ:



  • सत्याग्रह: गांधी द्वारा विकसित आंदोलन जो सत्य के लिए आत्मबलिदान की प्रेरणा देता है।
  • उपवास और आत्मशुद्धि: आत्मसंयम और नैतिक शक्ति का प्रदर्शन।
  • जनभागीदारी: अहिंसक आंदोलन में जनता की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है।




समकालीन प्रभाव:



गांधी के शांतिपूर्ण आंदोलन ने विश्व भर में प्रभाव डाला — जैसे मार्टिन लूथर किंग का नागरिक अधिकार आंदोलन और नेल्सन मंडेला का रंगभेद विरोध।



निष्कर्ष:



गांधी का शांतिपूर्ण आंदोलन एक क्रांतिकारी विचार था, जिसने यह सिखाया कि राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन नैतिक साधनों से संभव है।





3. गांधी के उपरांत अहिंसात्मक आंदोलन की महत्वपूर्ण विशेषताओं की व्याख्या कीजिए



गांधी के निधन के बाद भी उनकी अहिंसात्मक आंदोलन की अवधारणा अनेक आंदोलनों में जीवित रही। इसकी प्रमुख विशेषताओं को निम्न प्रकार से देखा जा सकता है:



1. नैतिकता पर आधारित संघर्ष:



गांधी के बाद के आंदोलनों में नैतिक मूल्य और सत्य की प्रमुखता बनी रही, जैसे विनोबा भावे का भूदान आंदोलन।



2. जनता की भागीदारी:



चिपको आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन आदि में लोगों की सक्रिय भागीदारी अहिंसक रूप में हुई।



3. विकेंद्रीकरण की मांग:



ग्राम स्वराज और पर्यावरणीय न्याय की मांग, जैसे आंदोलनों में विकेंद्रित शासन प्रणाली की आवश्यकता व्यक्त की गई।



4. संवाद आधारित विरोध:



अहिंसात्मक आंदोलनों में वार्ता और जनजागरूकता के ज़रिए व्यवस्था में बदलाव लाने का प्रयास होता है।



5. वैश्विक प्रभाव:



नेल्सन मंडेला, दलाई लामा और आंग सान सू की जैसे नेताओं ने गांधीवादी तरीके अपनाए।



निष्कर्ष:



गांधी के बाद के अहिंसक आंदोलन वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार, सामाजिक न्याय, और पर्यावरण सुरक्षा के प्रभावशाली साधन बन गए हैं।





4. क्या संपूर्ण क्रांति की धारणा एक काल्पनिक (यूटोपिया) है? व्याख्या कीजिए



“संपूर्ण क्रांति” की अवधारणा जयप्रकाश नारायण द्वारा दी गई, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और नैतिक क्षेत्रों में समग्र परिवर्तन की मांग की गई।



यूटोपियन दृष्टिकोण:



  • आलोचकों के अनुसार एक साथ इतने स्तरों पर क्रांति लाना एक आदर्शवादी कल्पना मात्र है।
  • भारत जैसे विविधताओं वाले देश में व्यापक क्रांति अस्थिरता भी ला सकती है।




वास्तविकतावादी पक्ष:



  • हालांकि यह विचार आदर्शवादी लगता है, परंतु इसके कई तत्व व्यावहारिक हैं – जैसे विकेंद्रीकरण, पारदर्शिता और जनशक्ति।
  • 1974 के बिहार आंदोलन में युवाओं ने इसी विचार के अंतर्गत बदलाव की पहल की।




गांधी से संबंध:



गांधी भी संपूर्ण जीवन परिवर्तन के पक्षधर थे – आचार, विचार और व्यवहार सभी में।



निष्कर्ष:



संपूर्ण क्रांति यद्यपि एक आदर्श अवधारणा है, लेकिन यह समाज को प्रेरित करने वाला विचार बन गया है, जो यथार्थ और कल्पना के बीच की पुल बनाता है।





5. प्रकृति और वातावरण की सुरक्षा के संदर्भ में गांधी के विचारों पर प्रकाश डालिए



गांधी का दृष्टिकोण आधुनिक पर्यावरणीय चिंताओं के बहुत पहले ही प्रकृति और संसाधनों के प्रति संवेदनशील था।



प्रमुख विचार:



  • “पृथ्वी सबकी ज़रूरतें पूरी कर सकती है, लेकिन लालच नहीं।”
  • वे साधनों के संयमित उपयोग और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के पक्षधर थे।
  • औद्योगीकरण और उपभोक्तावाद के विरोधी थे क्योंकि इससे प्रकृति का दोहन होता है।




आधुनिक आंदोलनों पर प्रभाव:



  • चिपको आंदोलन में गांधी के विचारों की स्पष्ट झलक है।
  • पर्यावरण संरक्षण में स्वदेशी, पुनर्चक्रण और टिकाऊ जीवनशैली का आग्रह किया।




निष्कर्ष:



गांधी का विचार था कि प्रकृति का शोषण आत्मघाती है। उनका जीवन ही पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण था – सादगी, संयम और सह-अस्तित्व।



6. नागरिक अधिकारों के अर्थ और महत्व की चर्चा समकालीन विश्व के संदर्भ में कीजिए



नागरिक अधिकार (Civil Rights) का तात्पर्य उन अधिकारों से है जो एक व्यक्ति को समाज और राज्य में समानता, स्वतंत्रता, न्याय, और गरिमा के साथ जीने की गारंटी देते हैं। ये अधिकार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल स्तंभ होते हैं।



अर्थ:



नागरिक अधिकारों में सम्मिलित होते हैं:


  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • समानता का अधिकार
  • मतदान का अधिकार
  • धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता
  • अनुचित गिरफ्तारी और अत्याचार से संरक्षण




महात्मा गांधी और नागरिक अधिकार:



गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के नागरिक अधिकारों के लिए सत्याग्रह की शुरुआत की। उनके अनुसार, नागरिक अधिकार किसी सरकार द्वारा दिए नहीं जाते, ये मानव के जन्मसिद्ध अधिकार हैं।



समकालीन विश्व में महत्व:



  1. लोकतंत्र की रक्षा:
    • आज की दुनिया में तानाशाही प्रवृत्तियाँ, जैसे – चीन, रूस, या म्यांमार में नागरिक स्वतंत्रता का हनन, लोकतंत्र के लिए खतरा है।
    • गांधी का अहिंसक प्रतिरोध इन प्रवृत्तियों के विरुद्ध एक नैतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

  2. मानवाधिकार आंदोलनों की नींव:
    • अमेरिका का Civil Rights Movement (मार्टिन लूथर किंग द्वारा) गांधी के विचारों से प्रेरित था।
    • हांगकांग, चिली और सूडान जैसे देशों में अहिंसात्मक आंदोलन नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हुए।

  3. डिजिटल युग में अधिकार:
    • इंटरनेट स्वतंत्रता, डेटा सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे नए नागरिक अधिकार बनते जा रहे हैं।
    • गांधी के विचारों के अनुरूप, नैतिकता और पारदर्शिता का आग्रह आवश्यक है।




निष्कर्ष:



नागरिक अधिकार केवल कानून में निहित नहीं होते, बल्कि जनता की सजगता, नैतिकता और संघर्ष की चेतना से सुरक्षित रहते हैं। गांधी के दृष्टिकोण में, अहिंसा और सत्य ही नागरिक अधिकारों के सबसे बड़े रक्षक हैं।





7. रंगभेद की समाप्ति में वैश्विक समीकरण की व्याख्या कीजिए



रंगभेद (Apartheid) दक्षिण अफ्रीका की एक नस्लीय प्रणाली थी, जिसमें अश्वेतों और अन्य गैर-श्वेत नस्लों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से अलग कर दिया गया था।



गांधी और रंगभेद:



  • गांधी का रंगभेद से संघर्ष दक्षिण अफ्रीका में 1893 से शुरू हुआ। यहीं उन्होंने सत्याग्रह की अवधारणा विकसित की।
  • उन्होंने रेलवे स्टेशन, अदालत और समाज में हो रहे नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रतिरोध किए।




वैश्विक समीकरण:



  1. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध:
    • 1960 के दशक से UN ने दक्षिण अफ्रीका पर आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंध लगाने शुरू किए।
    • कई देशों ने दक्षिण अफ्रीकी सरकार के साथ व्यापार और खेल संबंध समाप्त किए।

  2. नेल्सन मंडेला और गांधीवादी विचार:
    • मंडेला ने गांधी के अहिंसात्मक संघर्ष को “राजनीतिक मार्गदर्शक” माना।
    • African National Congress (ANC) ने रंगभेद के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय समर्थन और नैतिक आधार Gandhi से लिया।

  3. अंतरराष्ट्रीय जन आंदोलन:
    • अमेरिका, यूरोप, और भारत में छात्रों, बुद्धिजीवियों और मजदूर संगठनों ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ प्रदर्शन किए।
    • गांधीवादी नैतिकता ने इन आंदोलनों को वैश्विक नैतिक आंदोलन का रूप दिया।

  4. 1990 में रंगभेद का अंत:
    • वैश्विक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और आंतरिक संघर्ष ने रंगभेद शासन को झुकने पर मजबूर किया।
    • 1994 में दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक चुनाव हुए और नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति बने।




निष्कर्ष:



रंगभेद की समाप्ति कोई एक देश की लड़ाई नहीं थी, बल्कि गांधी द्वारा शुरू की गई नैतिक और अहिंसात्मक चेतना का वैश्विक विस्तार था। यह उदाहरण है कि नैतिक बल, जनचेतना और वैश्विक समर्थन से किसी भी अन्यायपूर्ण व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है।



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