1. गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics)
गणित केवल गणनाओं के बारे में नहीं है, बल्कि यह सोचने का एक तरीका है।
• तार्किक और क्रमबद्ध (Logical & Systematic): गणित तार्किक सोच पर आधारित है। इसमें अवधारणाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।
• अमूर्त से मूर्त (Abstract to Concrete): गणितीय अवधारणाएं अमूर्त (Abstract) होती हैं, जिन्हें शिक्षण के दौरान 'मूर्त' (Concrete) उदाहरणों से समझाना पड़ता है।
• उदाहरण: 'आयतन' (Volume) समझाने के लिए पहले पानी के गिलास या डिब्बे का प्रयोग करना।
2. वैन हीले के ज्यामितीय विचार के स्तर (Levels 0 - 4)
स्तर 0: दृश्यीकरण (Visualization)
• विवरण: इस स्तर पर बच्चा आकृतियों को उनके पूर्ण रूप और दिखावट (Appearance) के आधार पर पहचानता है। वह गुणों (Properties) के बारे में नहीं सोचता।
• सोच का तरीका: "यह गोल है क्योंकि यह रोटी जैसा दिखता है।"
• उदाहरण: बच्चा एक वर्ग (Square) और आयत (Rectangle) को केवल उनके आकार के आधार पर अलग करता है।
स्तर 1: विश्लेषण (Analysis)
• विवरण: यहाँ बच्चा आकृतियों के गुणों (Properties) को समझना शुरू कर देता है। वह पहचानता है कि किसी आकृति में कितनी भुजाएं या कोण हैं।
• सोच का तरीका: "वर्ग की चारों भुजाएं बराबर होती हैं और हर कोण 90^\circ का होता है।"
• उदाहरण: वह वर्ग को उसके गुणों के आधार पर परिभाषित कर सकता है, लेकिन विभिन्न आकृतियों के बीच संबंध नहीं बना पाता।
स्तर 2: अनौपचारिक निगमन (Informal Deduction / Abstraction)
• विवरण: बच्चा आकृतियों के गुणों के बीच संबंध (Relationship) स्थापित करना सीख जाता है। वह परिभाषाओं को समझना और अर्थ निकालना शुरू करता है।
• सोच का तरीका: "चूँकि वर्ग की चारों भुजाएं बराबर हैं और कोण समकोण हैं, इसलिए हर वर्ग एक आयत भी है।"
• उदाहरण: आकृतियों का सार्थक वर्गीकरण करना।
स्तर 3: औपचारिक निगमन (Formal Deduction)
• विवरण: इस स्तर पर छात्र प्रमेयों (Theorems) और तार्किक प्रमाणों (Logical Proofs) को समझना शुरू करता है। वह स्वयं सिद्धियों (Axioms) और प्रमाणों के महत्व को समझता है।
• सोच का तरीका: "पाइथागोरस प्रमेय को तार्किक रूप से सिद्ध किया जा सकता है।"
• उदाहरण: हाई स्कूल स्तर की ज्यामिति जहाँ छात्र SSS या SAS जैसी सर्वांगसमता (Congruency) को सिद्ध करते हैं।
स्तर 4: दृढ़ता / कठोरता (Rigor)
• विवरण: यह अंतिम और सबसे उच्च स्तर है। यहाँ गणितज्ञ विभिन्न ज्यामितीय प्रणालियों (जैसे यूक्लिडियन और गैर-यूक्लिडियन ज्यामिति) के बीच अंतर और तुलना कर सकते हैं।
• सोच का तरीका: अमूर्त गणितीय प्रणालियों का विश्लेषण करना बिना किसी मूर्त (Concrete) मॉडल के।
• उदाहरण: कॉलेज या शोध स्तर की ज्यामिति जहाँ सिद्धांतों की सटीकता और उनके अंतर्संबंधों का गहन अध्ययन किया जाता है।
• नैदानिक (Diagnostic): छात्र गणित की किस विशेष अवधारणा में गलती कर रहे हैं, उस कमी का पता लगाना।
• उपचारात्मक (Remedial): कमी पता चलने के बाद उसे दूर करने के लिए विशेष शिक्षण विधियों का उपयोग करना।
• उदाहरण: यदि छात्र 'हासिल' (Carry) वाले जोड़ में गलती कर रहा है, तो उसे 'स्थान मान' (Place Value) दोबारा समझाना।
4. गणितीय भाषा और शिक्षण सहायक सामग्री (TLM)
गणित को रोचक और सुलभ बनाने के लिए उपकरणों का प्रयोग आवश्यक है:
• Dienes Blocks: स्थान मान (Place Value), जोड़, और घटाव सिखाने के लिए।
• Abacus (गिंतारा): गिनती और स्थान मान सिखाने के लिए।
• Geo-board: ज्यामितीय आकृतियों और उनके गुणों को समझाने के लिए।
• Tangram: स्थानिक समझ (Spatial Understanding) और पहेलियों के माध्यम से आकृतियों के ज्ञान के लिए।
5. एनसीएफ (NCF) 2005 के अनुसार गणित शिक्षण के उद्देश्य
• गणितीयकरण (Mathematization): बच्चे की विचार प्रक्रियाओं का गणितीयकरण करना, न कि केवल सूत्रों को रटना।
• संकीर्ण उद्देश्य (Narrow Aim): संख्यात्मक कौशल और गणना विकसित करना।
• उच्च उद्देश्य (Higher Aim): समस्या समाधान, विश्लेषण और तार्किक निष्कर्ष निकालने की क्षमता विकसित करना।
प्रमुख शिक्षण विधियाँ (Teaching Methods)
• आगमन विधि (Inductive Method): उदाहरण से नियम की ओर (Concrete to Abstract)। प्राथमिक स्तर के लिए सर्वश्रेष्ठ।
• निगमन विधि (Deductive Method): नियम से उदाहरण की ओर। उच्च प्राथमिक स्तर के लिए उपयोगी।
• विश्लेषण विधि (Analytic Method): अज्ञात से ज्ञात की ओर। किसी समस्या को छोटे टुकड़ों में तोड़ना।
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