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CTET 2026, 8 Feb Paper- 2 CDP

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कौन है Pratika Rawal? जिसने महिला क्रिकेट में मचाया तहलका!

 प्रतीका रावल कौन हैं? बीसीसीआई अंपायर की बेटी, जिन्होंने आयरलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक 154 रन बनाए


भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओपनर बल्लेबाज, 24 वर्षीय प्रतीका रावल, ने आयरलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में 154 रनों की शानदार पारी खेलकर सभी का ध्यान आकर्षित किया है। 




प्रतीका रावल का परिचय:

जन्म: 1 सितंबर 2000, दिल्ली।

पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता, प्रदीप रावल, दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के बीसीसीआई-प्रमाणित लेवल-II अंपायर हैं, जिससे प्रतीका का क्रिकेट से गहरा नाता है। 

शिक्षा: प्रतीका ने मॉडर्न स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 92.5% अंक हासिल किए। बाद में, उन्होंने नई दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज से मनोविज्ञान में स्नातक किया। 

खेल में रुचि: बचपन में, प्रतीका क्रिकेट के साथ-साथ बास्केटबॉल भी खेलती थीं। उन्होंने बाल भारती स्कूल की टीम के लिए खेलते हुए जनवरी 2019 में दिल्ली में आयोजित 64वें स्कूल राष्ट्रीय खेलों में बास्केटबॉल में स्वर्ण पदक जीता था। 


क्रिकेट करियर:

प्रशिक्षण: प्रतीका ने जिमखाना क्रिकेट अकादमी में कोच शरवन कुमार से क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। 

घरेलू क्रिकेट: उन्होंने रेलवे की ओर से घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लिया और 2021 से 2024 तक दिल्ली के लिए खेलीं। 

अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण: प्रतीका ने पिछले महीने वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया, जहां उन्होंने पहले मैच में 40 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। 


आयरलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक पारी:


राजकोट में खेले गए तीसरे वनडे मैच में, प्रतीका ने 129 गेंदों में 154 रन बनाए, जिसमें 20 चौके और 1 छक्का शामिल था। यह उनका एकदिवसीय करियर का पहला शतक था, जिसने भारतीय महिला टीम को 435 रनों के विशाल स्कोर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 


उपलब्धियां:

प्रतीका ने अपने छठे वनडे मैच में ही 154 रनों की पारी खेलकर सबसे तेज 400 रन पूरे करने का रिकॉर्ड बनाया, जिससे उन्होंने थाईलैंड की नत्थाकन चैंथम का रिकॉर्ड तोड़ा। 

उनकी इस पारी ने भारतीय महिला क्रिकेट में एक नई उम्मीद जगाई है, और वे भविष्य में टीम की महत्वपूर्ण सदस्य बन सकती हैं।


निष्कर्ष:


प्रतीका रावल की यह पारी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है। उनकी मेहनत, समर्पण और खेल के प्रति जुनून ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है, और भविष्य में उनसे और भी बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।

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