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CTET Maths Pedagogy Notes in Hindi

  1. गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) गणित केवल गणनाओं के बारे में नहीं है, बल्कि यह सोचने का एक तरीका है। • तार्किक और क्रमबद्ध (Logical & Systematic): गणित तार्किक सोच पर आधारित है। इसमें अवधारणाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। • अमूर्त से मूर्त (Abstract to Concrete): गणितीय अवधारणाएं अमूर्त (Abstract) होती हैं, जिन्हें शिक्षण के दौरान 'मूर्त' (Concrete) उदाहरणों से समझाना पड़ता है। • उदाहरण: 'आयतन' (Volume) समझाने के लिए पहले पानी के गिलास या डिब्बे का प्रयोग करना। 2. वैन हीले के ज्यामितीय विचार के स्तर (Levels 0 - 4) स्तर 0: दृश्यीकरण (Visualization) • विवरण: इस स्तर पर बच्चा आकृतियों को उनके पूर्ण रूप और दिखावट (Appearance) के आधार पर पहचानता है। वह गुणों (Properties) के बारे में नहीं सोचता। • सोच का तरीका: "यह गोल है क्योंकि यह रोटी जैसा दिखता है।" • उदाहरण: बच्चा एक वर्ग (Square) और आयत (Rectangle) को केवल उनके आकार के आधार पर अलग करता है। स्तर 1: विश्लेषण (Analysis) • विवरण: यहाँ बच्चा आकृतियों के गुणों (Properties) को समझना ...

EMRS: शिक्षण की प्रकृति (Nature of Teaching) Notes

शिक्षण की प्रकृति - EMRS परीक्षा के लिए

शिक्षण की प्रकृति (Nature of Teaching)

EMRS परीक्षा के लिए शिक्षण अभिवृत्ति विषय पर विस्तृत नोट्स

शिक्षण क्या है? (What is Teaching?)

शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति (शिक्षक) दूसरे व्यक्ति (छात्र) को ज्ञान, कौशल और मूल्य प्रदान करता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो सीखने की सुविधा प्रदान करती है और छात्रों के समग्र विकास में मदद करती है।

शिक्षण एक गतिशील, सृजनात्मक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि यह छात्रों में सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है।

शिक्षण की प्रकृति के मुख्य पहलू (Key Aspects of Nature of Teaching)

1. शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है

शिक्षण समाज की आवश्यकताओं और मूल्यों से प्रभावित होता है। यह समाज और विद्यार्थी के बीच एक कड़ी का काम करता है। शिक्षक समाज के मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करता है।

2. शिक्षण एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है

शिक्षण हमेशा कुछ निश्चित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया जाता है। इन उद्देश्यों में छात्रों का बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास शामिल होता है।

3. शिक्षण एक पारस्परिक प्रक्रिया है

शिक्षण में शिक्षक और छात्र दोनों सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। यह एक द्वि-दिशात्मक प्रक्रिया है जहाँ शिक्षक और छात्र एक-दूसरे से सीखते हैं।

4. शिक्षण एक कला और विज्ञान दोनों है

शिक्षण एक कला है क्योंकि इसमें रचनात्मकता और अभिव्यक्ति शामिल है। साथ ही, यह एक विज्ञान भी है क्योंकि इसमें शिक्षण के सिद्धांतों, तकनीकों और विधियों का वैज्ञानिक अध्ययन शामिल है।

5. शिक्षण एक गतिशील प्रक्रिया है

शिक्षण स्थिर नहीं है, बल्कि यह बदलती परिस्थितियों, आवश्यकताओं और तकनीक के साथ विकसित होती रहती है।

शिक्षण के प्रमुख सिद्धांत (Major Principles of Teaching)

सक्रिय सहभागिता का सिद्धांत (Principle of Active Participation)

यह सिद्धांत बताता है कि शिक्षण प्रक्रिया में छात्रों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब छात्र सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो सीखना अधिक प्रभावी होता है।

व्यक्तिगत भिन्नताओं का सिद्धांत (Principle of Individual Differences)

प्रत्येक छात्र अद्वितीय है और उसकी सीखने की क्षमता, रुचि और आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं। शिक्षण में इन भिन्नताओं को ध्यान में रखना चाहिए।

जीवन से संबंध का सिद्धांत (Principle of Correlation with Life)

शिक्षण को छात्रों के दैनिक जीवन और अनुभवों से जोड़ा जाना चाहिए। इससे सीखना अधिक सार्थक और प्रासंगिक बनता है।

प्रेरणा का सिद्धांत (Principle of Motivation)

प्रेरणा सीखने की प्रक्रिया का आधार है। शिक्षक को छात्रों को आंतरिक और बाह्य रूप से प्रेरित करना चाहिए।

शिक्षण के प्रकार (Types of Teaching)

1. आदेशात्मक शिक्षण (Authoritative Teaching)

इस पद्धति में शिक्षक केंद्र में होता है और वह ज्ञान का प्राथमिक स्रोत होता है। छात्र निष्क्रिय श्रोता की भूमिका निभाते हैं।

2. सहभागी शिक्षण (Participatory Teaching)

इस पद्धति में शिक्षक और छात्र दोनों सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। चर्चाएँ, समूह कार्य और परियोजनाएँ इसके उदाहरण हैं।

3. समस्या-आधारित शिक्षण (Problem-Based Teaching)

इस पद्धति में छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याएँ दी जाती हैं और वे स्वयं समाधान ढूंढते हैं। यह छात्रों में समस्या-समाधान कौशल विकसित करता है।

4. सहकारी शिक्षण (Cooperative Teaching)

इस पद्धति में छात्र छोटे समूहों में काम करते हैं और एक-दूसरे से सीखते हैं। यह सामाजिक कौशल और टीम वर्क को बढ़ावा देता है।

आधुनिक शिक्षण में रुझान (Trends in Modern Teaching)

  • प्रौद्योगिकी एकीकरण: डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन संसाधनों का शिक्षण में बढ़ता उपयोग
  • व्यक्तिगत शिक्षण: प्रत्येक छात्र की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण देना
  • समग्र विकास: केवल शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि छात्रों का सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास
  • मूल्यांकन में विविधता: केवल लिखित परीक्षाओं के बजाय विभिन्न मूल्यांकन विधियों का उपयोग
  • सीखने के लिए मूल्यांकन: मूल्यांकन को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाना

निष्कर्ष (Conclusion)

शिक्षण एक जटिल, बहुआयामी और गतिशील प्रक्रिया है जो समाज की आवश्यकताओं के साथ विकसित होती रहती है। एक प्रभावी शिक्षक न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच विकसित करने में मदद करता है। आधुनिक शिक्षण में, छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी एकीकरण और समग्र विकास पर जोर दिया जा रहा है।

EMRS परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षण अभिवृत्ति नोट्स

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